संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में संगठित अपराध के सबसे तेज़ी से बढ़ते रूपों में से एक अवैध ऑनलाइन जुआ बना हुआ है। अपराधी नेटवर्क युवा यूज़र्स को आकर्षित करने के लिए अवैध जुए के तरीकों का तेज़ी से इस्तेमाल कर रहे हैं।
बैंकॉक में जारी ‘दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए 2026 ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज़्ड क्राइम थ्रेट असेसमेंट’ (अंतर-देशीय संगठित अपराध के खतरे का आकलन) रिपोर्ट यह बताती है कि अपराधी समूह पारंपरिक गतिविधियों से आगे बढ़कर कैसे विकसित हो रहे हैं। रिपोर्ट में मुख्य रूप से अवैध जुए, साइबर स्कैम, मानव तस्करी, तंबाकू से जुड़े अपराध और हथियारों की तस्करी को शामिल किया गया है और इन्हें एक ही, आपस में जुड़े हुए आपराधिक इकोसिस्टम का हिस्सा बताया गया है।
रिपोर्ट की मुख्य बातों में से एक यह है कि ऑनलाइन गेमिंग और ऑनलाइन जुए के बीच का अंतर तेज़ी से धुंधला होता जा रहा है। UNODC की दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र की प्रतिनिधि डेल्फिन शैंट्ज़ ने कहा, “ऑनलाइन गेमिंग और ऑनलाइन जुए के बीच का अंतर तेज़ी से धुंधला होता जा रहा है।”
कई एशियाई देश प्रभावित
उन्होंने बताया कि वीडियो गेम से जुड़े फीचर्स का इस्तेमाल अब जुए के प्लेटफ़ॉर्म को ज़्यादा आकर्षक बनाने के लिए किया जा रहा है, खासकर युवा दर्शकों के लिए। स्मार्टफोन के व्यापक इस्तेमाल और आसानी से इंटरनेट मिलने के कारण, ये फीचर्स अवैध जुए को पहले से कहीं ज़्यादा आसान बना रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह ट्रेंड भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों को प्रभावित कर रहा है। UNODC का कहना है कि जुए के अलावा, संगठित अपराध करने वाले ग्रुप अब सिर्फ़ एक गैर-कानूनी काम करने वाले अलग-थलग ग्रुप के तौर पर काम नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय, वे अब ऐसे जुड़े हुए नेटवर्क के तौर पर काम करते हैं जो कई तरह के अपराधों—जैसे साइबर फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग, प्रवासियों की तस्करी और मानव तस्करी—के लिए एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हैं।
“उनके काम करने का तरीका कॉर्पोरेट फ्रैंचाइज़िंग जैसा है,” शैंट्ज़ ने कहा। “सोचिए कि मनी लॉन्ड्रिंग, लोगों की तस्करी, प्रवासियों की तस्करी और डेटा इकट्ठा करने के लिए अलग-अलग स्पेशलाइज़्ड डिपार्टमेंट हों, और ये सभी एक ही सर्विस-बेस्ड, आपस में जुड़े नेटवर्क से जुड़े हों।”
सख़्ती के बावजूद समस्याएँ
इन गतिविधियों से जुड़ी मानव तस्करी भी बढ़ रही है। UNODC ने कहा है कि इस इलाके में फैले स्कैम सेंटर्स में कम से कम 80 देशों और इलाकों के पीड़ितों की पहचान की गई है।
खबरों के मुताबिक, म्यांमार बॉर्डर के पास चल रहे सेंटर्स से सैकड़ों भारतीयों को बचाया गया है। उन्हें सॉफ्टवेयर की नौकरी का लालच देकर वहां ले जाया गया था और फिर ऑनलाइन स्कैम सिंडिकेट के लिए काम करने पर मजबूर किया गया था।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि लोगों को भर्ती करने वाले नेटवर्क एशिया से बाहर भी फैल रहे हैं। अब ऐसे विज्ञापन भी आ रहे हैं जिनमें स्कैम गतिविधियों में मदद के लिए यूरोपीय भाषा जानने वाले लोगों को टारगेट किया जा रहा है।
धोखाधड़ी के लिए AI का इस्तेमाल
साथ ही, अपराधी अपने काम को बढ़ाने के लिए नई-नई टेक्नोलॉजी अपना रहे हैं। रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक और ऑटोमेटेड फ्रॉड टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई है, जिनमें इंसानी दखल की बहुत कम ज़रूरत होती है। इसमें यह भी बताया गया है कि “मैल्वरटाइजिंग” (malvertising) हमले – जिनमें असली ऑनलाइन विज्ञापन नेटवर्क का इस्तेमाल मैलवेयर फैलाने के लिए किया जाता है – 2025 में 42 प्रतिशत बढ़ गए।
UNODC के लीड एनालिस्ट इनशिक सिम ने कहा कि संगठित अपराध के तेज़ी से फैलने से ऐसी सहायक सेवाओं का पूरा इकोसिस्टम बन गया है जो अक्सर वैध लगती हैं। एजेंसी का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ़ पारंपरिक कानून प्रवर्तन ही काफ़ी नहीं होगा।
इसके बजाय, यह सरकारों से रोकथाम के प्रयासों को मज़बूत करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहतर करने और आपराधिक गतिविधियों से हुई कमाई—खासकर क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए ट्रांसफर की गई कमाई—का पता लगाने और उसे वापस पाने में ज़्यादा विशेषज्ञता विकसित करने का आग्रह कर रही है।
UNODC के अनुसार, संगठित अपराध पारंपरिक कानून प्रवर्तन तरीकों की तुलना में तेज़ी से विकसित हो रहा है, जिससे समन्वित वैश्विक प्रतिक्रियाएँ और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं।
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